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Home»Stories In Hindi»5 Hindi Stories for Class 2: Best Moral Stories for Kids
hindi story for class 2

5 Hindi Stories for Class 2: Best Moral Stories for Kids

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By Sahil on March 10, 2025 Stories In Hindi
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बंदर और कपड़े

बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल के पास एक छोटा-सा गाँव था। उस गाँव में रामू नाम का एक धोबी रहता था। वह रोज़ गाँव के लोगों के कपड़े धोता और उन्हें धूप में सुखाने के लिए अपने आँगन में डाल देता था।

गाँव के पास ही एक बड़ा पीपल का पेड़ था, जहाँ कई बंदर रहते थे। बंदरों को लोगों की चीज़ें उठाकर भागने में बहुत मज़ा आता था।

बंदर की शरारत

एक दिन, जब रामू कपड़े धोकर सूखने के लिए डाल रहा था, तभी एक शरारती बंदर वहाँ आ गया। उसने देखा कि सफेद कपड़े रस्सी पर टंगे हुए हैं। बंदर ने कुछ कपड़े उठाकर पहन लिए और भाग गया। गाँव के लोग यह देखकर हँसने लगे।

समस्या और हल

रामू ने अगले दिन पुराने और गंदे कपड़े रस्सी पर डाल दिए। जब बंदर आया और उन कपड़ों को उठाया, तो उन्हें पहनते ही बदबू से परेशान हो गया और भाग गया। इसके बाद उसने कभी कपड़ों को नहीं चुराया।

सीख

शरारत कभी-कभी मुसीबत बन सकती है और समझदारी से किसी भी समस्या का हल निकाला जा सकता है।

चींटी और कबूतर

चींटी और कबूतर

गर्मियों के दिनों में एक चींटी पानी की तलाश में घूम रही थी। चलते-चलते वह नदी के पास पहुँची और पानी पीने लगी। अचानक उसका पैर फिसल गया और वह पानी में गिर पड़ी।

कबूतर की मदद

पास के पेड़ पर बैठा एक कबूतर यह सब देख रहा था। उसने तुरंत एक पत्ता तोड़कर पानी में फेंक दिया। चींटी पत्ते पर चढ़ गई और सुरक्षित बाहर आ गई।

कुछ दिनों बाद, एक शिकारी उस कबूतर को पकड़ने आया। चींटी ने यह देखा और शिकारी के पैर पर जोर से काट लिया। दर्द के कारण शिकारी की पकड़ ढीली हो गई और कबूतर उड़ गया।

सीख

अच्छे कामों का फल हमेशा अच्छा ही मिलता है।

लोमड़ी और अंगूर

लोमड़ी और अंगूर

एक दिन, एक भूखी लोमड़ी जंगल में घूम रही थी। उसे एक बेल पर रसीले अंगूर लटकते हुए दिखे। वह बहुत खुश हुई और उन्हें खाने के लिए कूदने लगी।

असंभव कोशिश

लोमड़ी ने बार-बार ऊँचाई पर छलांग लगाई, लेकिन वह अंगूर तक नहीं पहुँच पाई। अंत में, उसने थककर हार मान ली और गुस्से में बोली, “ये अंगूर तो खट्टे हैं!” और वहाँ से चली गई।

सीख

हमेशा मेहनत करनी चाहिए, और जो चीज़ें हमें नहीं मिलतीं, उनके बारे में गलत बोलना सही नहीं है।

खरगोश और कछुआ

एक जंगल में एक तेज़ दौड़ने वाला खरगोश और एक धीमा चलने वाला कछुआ रहते थे। खरगोश को अपनी तेज़ी पर बहुत घमंड था और वह कछुए का मज़ाक उड़ाता था।

दौड़ की चुनौती

एक दिन, कछुए ने खरगोश को दौड़ की चुनौती दी। खरगोश यह सुनकर हँसने लगा लेकिन उसने चुनौती स्वीकार कर ली। दौड़ शुरू हुई, और खरगोश बहुत आगे निकल गया।

रास्ते में उसने सोचा कि कछुआ तो बहुत धीरे-धीरे आ रहा होगा, इसलिए उसने आराम करने के लिए पेड़ के नीचे सोने का फैसला किया।

जब खरगोश उठा, तो उसने देखा कि कछुआ धीरे-धीरे आगे बढ़ता हुआ जीत की रेखा पार कर चुका था।

सीख

अहंकार और लापरवाही से हार मिलती है, जबकि निरंतर मेहनत सफलता दिलाती है।

दो बिल्लियाँ और बंदर

दो बिल्लियाँ और बंदर

एक बार की बात है, दो बिल्लियों को एक रोटी मिली। दोनों उसे आपस में बाँटना चाहती थीं, लेकिन वे झगड़ने लगीं कि कौन कितनी रोटी लेगा।

बंदर की चालाकी

उन्हें लगा कि कोई तीसरा उनकी मदद कर सकता है। उन्होंने एक बंदर से कहा कि वह रोटी को बराबर बाँट दे। बंदर ने रोटी के दो टुकड़े किए और फिर उनमें से एक को बड़ा देखकर उसने छोटे टुकड़े को खा लिया।

अब दूसरा टुकड़ा बड़ा लगने लगा, तो बंदर ने उसमें से भी थोड़ा खा लिया। इस तरह, उसने पूरी रोटी खा ली और बिल्लियों को कुछ भी नहीं मिला।

सीख

आपसी झगड़े का फायदा हमेशा कोई और उठाता है, इसलिए समझदारी से चीज़ों को बाँटना चाहिए।

मेहनती किसान और तीन बेटे

मेहनती किसान और तीन बेटे

पात्र
रामदास — किसान
राम — बड़ा बेटा
श्याम — मँझला बेटा
मोहन — छोटा बेटा
एक छोटे से गाँव में रामदास नाम का एक बूढ़ा किसान रहता था। उसके तीन बेटे थे — राम, श्याम और मोहन। तीनों बेटे बड़े आलसी थे। खेतों में काम करने की बजाय वे सारा दिन इधर-उधर घूमते रहते थे। रामदास बीमार पड़ गया और उसे चिंता हुई कि उसके जाने के बाद खेत कौन सँभालेगा।

एक दिन रामदास ने तीनों बेटों को पास बुलाया और धीरे से कहा, “बेटों, मैंने अपने खेत में एक जगह खजाना छुपाया है। जब मेरा समय आए, तो उस खेत को खोदकर खजाना निकाल लेना।” यह कहकर किसान की आँखें बंद हो गईं।

कुछ दिनों बाद रामदास चल बसा। तीनों बेटों को खजाने की बात याद आई। अब उनके मन में लालच आ गया। बड़े भाई राम ने कहा, “चलो, खेत खोदकर खजाना निकालते हैं।” तीनों ने मिलकर पूरे खेत को फावड़े से खोद डाला। एक-एक इंच जमीन खोदी, लेकिन कहीं कोई खजाना नहीं मिला।

तीनों निराश होकर बैठ गए। मोहन ने कहा, “अब खेत खुद ही खुदा हुआ है। क्यों न इसमें बीज बो दें?” तीनों ने मिलकर खेत में गेहूँ के बीज बो दिए। कुछ हफ्तों में हरी-भरी फसल लहलहाने लगी। पूरे खेत में सोने जैसी फसल उग आई।

फसल काटने के बाद तीनों भाइयों को बहुत अधिक अनाज मिला। उन्होंने उसे बाजार में बेचा और खूब धन कमाया। तब मोहन को अचानक समझ आया — “अरे! यही तो पिताजी का खजाना था! मेहनत और खेती ही असली खजाना है!”

तीनों भाई खुशी-खुशी मिलकर काम करने लगे। अगले साल उनकी फसल और भी अच्छी हुई। उन्होंने अपने पिता की याद में गाँव में एक कुआँ भी खुदवाया। पूरे गाँव ने उनकी प्रशंसा की।

शिक्षा
मेहनत ही सबसे बड़ा खजाना है। परिश्रम से ही जीवन में सुख और सफलता मिलती है।

गुड़िया की सच्ची दोस्ती

गुड़िया की सच्ची दोस्ती

पात्र
पिंकी — एक लड़की
रिया — अमीर सहेली
मीना — गरीब सहेली
माँ — पिंकी की माँ
पिंकी एक छोटी-सी प्यारी बच्ची थी जो तीसरी गली में रहती थी। उसके स्कूल में दो सहेलियाँ थीं — रिया और मीना। रिया के पिता बड़े अफसर थे और उसके पास बहुत सारे खिलौने, सुंदर कपड़े और महँगा टिफिन होता था। मीना के पिता एक छोटे से दुकानदार थे और वह साधारण कपड़े पहनती थी।

एक दिन स्कूल में वार्षिक उत्सव आया। सभी बच्चों को कुछ न कुछ लाने को कहा गया। पिंकी की माँ ने उसके लिए एक सुंदर गुड़िया बनाई — कपड़े और रूई से। गुड़िया बहुत प्यारी लग रही थी, लेकिन वह दुकान से खरीदी हुई नहीं थी।

जब पिंकी गुड़िया लेकर स्कूल पहुँची, तो रिया ने उसकी गुड़िया देखकर हँसते हुए कहा, “यह क्या है? यह तो घर पर बनी सस्ती गुड़िया है! मेरी गुड़िया देखो, कितनी सुंदर है — बाजार से लाई है।” पास खड़ी कुछ लड़कियाँ भी हँसने लगीं। पिंकी को बहुत दुख हुआ और उसकी आँखें भर आईं।

तभी मीना आगे आई। उसने पिंकी की गुड़िया को हाथ में लिया और बड़े प्यार से बोली, “पिंकी, यह गुड़िया तो बहुत खास है! तुम्हारी माँ ने इसे प्यार से अपने हाथों से बनाया है। इसमें तुम्हारी माँ का प्यार और मेहनत दोनों हैं। यह दुनिया की सबसे खूबसूरत गुड़िया है।”

अध्यापिका ने यह सब सुन लिया था। उन्होंने पूरी कक्षा को समझाया, “बच्चों, असली खूबसूरती चीजों की कीमत में नहीं, उसमें लगे प्यार में होती है। पिंकी की माँ ने यह गुड़िया बहुत प्यार से बनाई है — इसलिए यह गुड़िया अनमोल है।” रिया को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने पिंकी से माफी माँगी।

उस दिन से पिंकी को पता चल गया कि सच्ची दोस्त मीना है — जो मुश्किल वक्त में साथ देती है। रिया ने भी अपना अहंकार छोड़ दिया और तीनों पक्की सहेलियाँ बन गईं। पिंकी की माँ की बनाई गुड़िया उस साल के उत्सव की सबसे यादगार चीज बनी।

शिक्षा 
सच्ची दोस्ती अमीरी-गरीबी नहीं देखती। प्यार और मेहनत की कोई कीमत नहीं होती।

आप और पढ़ें:

  • Lalach Buri Bala Hai: Ek Lalchi Vyapari Ki Dukhbhari Kahani Aur Seekh
  • Land Ki Kahani: Ek Kisan Ki Seekh Bhari Kahani Jo Zindagi Badal De
  • Devdas Is Real Story: Sach ya Sirf Ek Amar Kahani?

FAQs

ये कहानियाँ बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं
ये कहानियाँ नैतिक शिक्षा देती हैं और बच्चों को अच्छा व्यवहार सिखाती हैं।

सबसे अच्छी कहानी कौन-सी है
हर कहानी में कोई न कोई सीख छिपी होती है, इसलिए सभी अच्छी हैं।

इन कहानियों से बच्चे क्या सीख सकते हैं
बच्चे ईमानदारी, मेहनत, धैर्य और अच्छे आचरण के बारे में सीख सकते हैं।

क्या ये कहानियाँ छोटे बच्चों के लिए आसान हैं
हाँ, ये कहानियाँ सरल भाषा में लिखी गई हैं ताकि छोटे बच्चे भी आसानी से समझ सकें।

क्या ऐसी कहानियाँ स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं
हाँ, स्कूलों में नैतिक शिक्षा के लिए ऐसी कहानियाँ पढ़ाई जाती हैं।

 

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